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हवा और सूर्य का शर्त का दांव
एक समय की बात है, जब हवा और सूर्य देवता में इस बात पर बहस छिड़ गई कि उन दोनों में सबसे अधिक बलवान कौन है। हवा अपनी तेज़ गति और तूफान लाने की क्षमता पर गर्व करती थी, जबकि सूर्य अपने तेज और सबको गर्मी देने वाले प्रकाश पर।
वह दोनों इस झगड़े का कोई हल नहीं निकाल पा रहे थे। तभी उनकी नज़र नीचे धरती पर चल रहे एक यात्री पर पड़ी, जिसने अपने कंधों पर एक मोटी शाल ओढ़ रखी थी। हवा ने एक शर्त रखी: "देखते हैं हम में से कौन इस यात्री की शाल उतरवा पाता है। जो सफल होगा, वही सबसे बलवान माना जाएगा।" सूर्य इस शर्त पर राजी हो गया।
हवा का आक्रमण और असफलता
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पहले प्रयास का मौका हवा को मिला। उसने सोचा कि यह तो बहुत आसान काम है। वह ज़ोर-ज़ोर से बहने लगी, यात्री के चेहरे और शाल पर ज़बरदस्त झोंके मारने लगी। पर एक अनोखी बात हुई। हवा जितनी तेज़ और उग्र होती गई, यात्री उतना ही अपनी शाल को कसकर पकड़ता और लपेटता गया। हवा ने तूफान का रूप भी धारण कर लिया, पेड़ों को झकझोर दिया, पर यात्री डटा रहा और शाल नहीं छोड़ी। आखिरकार, थककर हवा को रुकना पड़ा। वह यात्री की शाल एक इंच भी नहीं हिला पाई थी।
सूर्य की कोमल विजय
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अब सूर्य की बारी थी। हवा के विपरीत, सूर्य ने कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाई। वह मुस्कुराया और धीरे-धीरे अपनी कोमल किरणें यात्री पर बिखेरनी शुरू कीं। पहले तो यात्री को सुहावनी गर्मी का अहसास हुआ। उसने शाल का खिंचाव थोड़ा ढीला छोड़ा। सूर्य ने अपनी गर्मी थोड़ी और बढ़ाई। अब यात्री को शाल ओढ़ने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही थी; बल्कि गर्मी लगने लगी थी। आखिरकार, सूर्य के दयालु और सतत प्रकाश के आगे यात्री ने हार मान ली और खुद ही शाल उतारकर अपने हाथ में ले ली। इस तरह, बिना किसी हलचल या ज़बरदस्ती के, सूर्य ने वह काम कर दिखाया जो हवा अपनी पूरी ताकत लगाकर भी नहीं कर पाई।
Wikipedia Reference (ईसप की दंतकथाओं के बारे में):
यह कहानी ईसप की दंतकथाओं में से एक है, जो एक ग्रीक दास और कथाकार ईसप से जुड़ी हुई मानी जाती हैं। ईसप की दंतकथाएँ छोटी-छोटी नैतिक शिक्षा वाली कहानियाँ हैं, जिनमें अक्सर जानवरों को पात्र बनाया गया है। ये कहानियाँ पश्चिमी साहित्य और संस्कृति पर गहरा प्रभाव डालती हैं और "द नॉर्थ विंड एंड द सन" इसी संग्रह का एक हिस्सा है।
शिक्षा: वास्तविक शक्ति का रहस्य
इस कहानी से हमें एक गहरी और सार्वभौमिक शिक्षा मिलती है। यह हमें बताती है कि ज़बरदस्ती और आक्रमण (हवा की तरह) अक्सर विरोध और हठ को जन्म देते हैं। दूसरी ओर, दयालुता, धैर्य और कोमल प्रभाव (सूर्य की तरह) लोगों के दिल और दिमाग को जीत सकते हैं और उन्हें स्वेच्छा से बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
चाहे बच्चों को पढ़ाना हो, टीम को लीड करना हो, या रिश्तों में समझ बनानी हो—नरमी और समझदारी का रास्ता हमेशा कठोरता और दबाव से अधिक प्रभावी होता है। असली बलवान वह नहीं है जो डरा कर काम निकालता है, बल्कि वह है जो प्रेम और बुद्धिमानी से सबका सहयोग पाता है।
कहानी की सीख:
ताकत का दुरुपयोग करने वाला कमजोर होता है, जबकि संयम और कोमलता से काम लेने वाला ही वास्तव में बलवान होता है। जीवन में सफलता पाने के लिए सूर्य की तरह धैर्यवान और प्रेमपूर्ण बनना चाहिए, हवा की तरह उग्र और जल्दबाज़ नहीं।
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